ये धूप मेरे घर तक भी आए तो अच्छा है

ये धूप मेरे घर तक भी आए तो अच्छा है रिश्तों की सीलन को सुखाए तो अच्छा है जो आँधियाँ अक्सर छप्पर उड़ाया करती हैं एक दफे मेरा अना* भी...
Read More

अपने जहन में संविधान रखता हूँ

मैं अपने कामों में ईमान रखता हूँ  सो सबसे अलग पहचान रखता हूँ सब इंसान लगते हैं मुझे एक जैसे  तासीर में हमेशा भगवान् रखता हूँ  ...
Read More

मैं जितना ही हूँ,उतना तो जरूर हूँ

अब इस तरह मुझे न बचा के रख फानूस के जैसे तो न सजा के रख मैं खुद तलाश लूँगा अपनी मंज़िलें बाज़ार में दाम मेरा न बता के रख मैं नई ...
Read More

जो परिन्दे डरते हैं हवाओं के बदलते रूख से

  जो मकाँ बनाते हैं,वो अपना घर नहीं बना पाते रेगिस्तान में उगने वाले पौधे जड़ नहीं बना पाते जिन्हें आदत हैं औरों के रहमो-करम पे ज...
Read More