अपने जहन में संविधान रखता हूँ

मैं अपने कामों में ईमान रखता हूँ  सो सबसे अलग पहचान रखता हूँ सब इंसान लगते हैं मुझे एक जैसे  तासीर में हमेशा भगवान् रखता हूँ  ...
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मैं जितना ही हूँ,उतना तो जरूर हूँ

अब इस तरह मुझे न बचा के रख फानूस के जैसे तो न सजा के रख मैं खुद तलाश लूँगा अपनी मंज़िलें बाज़ार में दाम मेरा न बता के रख मैं नई ...
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जो परिन्दे डरते हैं हवाओं के बदलते रूख से

  जो मकाँ बनाते हैं,वो अपना घर नहीं बना पाते रेगिस्तान में उगने वाले पौधे जड़ नहीं बना पाते जिन्हें आदत हैं औरों के रहमो-करम पे ज...
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इस होली

1. इस होली रँगना मुझे उन रंगों से जिसे जात धर्म की समझ ना हो जो छूट नहीं जाते हों बहशी बदरंग पानी से जिसकी खुशबू में न...
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