सुनहरे भविष्य का "महापर्व" है.

सिंहस्थ में लोग भयंकर गर्मी में कई किलोमीटर पैदल घूमे, तब किसी को ना तो गर्मी लगी ना चक्कर आये ना ही पैर दुखे, मंदिर में कई घंटों तक दर्शन के लिए खड़े रहने में तकलीफ नहीं होती, टिकट की लिए सिनेमाघरो में और क्रिकेट मैचेस की लाइन में खड़े रहने में तकलीफ नहीं होती है, देश के लिए मर मिटने की बाते करने वाले लोग देश के लिए 4 5 घंटे बैंक में लाइन में खड़े नहीं हो सकते । ऐसे लोग क्या देश के लिए मरेंगे जो कुछ घंटे बैंक की लाइन में खड़े नहीं हो सकते ।
काला धन वापस सबको चाहिए लेकिन जब काले धन को वापस लाने का समय आया तो सबकी हवा निकल गई ।
बड़े उद्देश्य को प्राप्त करने की लिए तकलीफे भी बड़ी ही सहन करनी पड़ती है ।

# लेकिन जबर्दस्त है :
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"सौ के नोट ने ,
हज़ार -पांच सौ के नोट से जिज्ञासा जताई ,
अब कैसा लग रहा है बड़े भाई ,
यह सुनकर हज़ार का नोट मुस्कराया ,
बोला -पूंजीपतियों ,हवाला और ,
आतंकवादियों ने बहुत रुलाया ,
न चाहते हुए भी हम ,
आतंकवाद में चल रहे थे ,
देश के सुनहरे पृष्ठ ,
हमारी आंच में जल रहे थे ,
अब हम देश की माटी का ,
क़र्ज़ चुका रहे हैं ,
किसी सैनिक की तरह ,
शहीद होकर जा रहे हैं ,
पर हमें अपनी शहादत पर गर्व है !
क्योंकि मेरी शहादत ,
सुनहरे भविष्य का "महापर्व" है...🙏🚩

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