खुले आसमाँ की धूप भी पिया कर(ग़ज़ल)

आलीशान महलों में वो गर्माहट नहीं कभी खुले आसमाँ की धूप भी पिया कर कोई फर्क ही नहीं है राम और अल्लाह में दिल जिसे मानता है,नाम उसी ...
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