GUIDELINES FOR SUBMISSION

शोध संचयन अर्धवार्षिक शोध जर्नल है जिसमे सामाजिक विषय एवं मानविकी के  विषयों से सम्बंधित सभी उपविषयों के मौलिक शोध-पत्र, शोध समीक्षा, विचार, लेखों आदि का भी प्रकाशन किया जाता है। शोधकर्ता हिंदी अथवा अंग्रेजी भाषा में अपने शोध पत्र भेज सकते हैं।
Name of the Journal :अक्सर (AKSAR)
ISSN Number :22782338
शोध पत्र भेजते समय कृपया निम्न बिन्दुओं पर ध्यान दें –
  1. शोध-पत्र अधिकतम 4000 -5000 शब्दों तक में हों तथा 150 शब्दों का सारांश (Mangal Font) भी प्रेषित करें।
  2. सन्दर्भ ग्रन्थ सूची का उल्लेख अवश्य करें।  सन्दर्भ ग्रन्थ सूची में लेखक का उपनाम, मुख्य नाम, पुस्तक का नाम, प्रकाशन का वर्ष एवं पृष्ठ संख्या अंकित होना चाहिए। पत्रिका के सन्दर्भ में लेख का शीर्षक, पत्रिका का नाम, अंक, पृष्ठ क्रम एवं प्रकाशन वर्ष दें।
  3. शोध-पत्र A -4 साइज़ के कागज पर कंप्यूटर से एक तरफ मुद्रित हो।
  4. शोध-पत्र Microsoft Office Word में  हिंदी में Krutidev 10, Mangal, DevLys 010, Kundli Hindi Normal, Krishna, Arjun, Devanagari  के Font Size 12  में टाइप करवाकर भेजें।
  5. ई-मेल द्वारा प्रपत्र अवश्य भेजें। aksarjournal@gmail.com
  6. शोध पत्रों की  स्वीकृति एवं अस्वीकृति का अंतिम निर्णय सम्बंधित विषय के दो विशेषज्ञो कि अनुशन्सा ( Expert comments of Referees) से संपादक मण्डल द्वारा लिया जाता है। इस संबन्ध में अन्तिम अधिकार संपादक को प्राप्त है जो सभी सदस्यो  को मान्य होगा।
  7. शोध पत्र के प्रकाशन हेतु संपादक के नाम पत्र होना चाहिए, जिसमें स्पष्ट रूप से शोध पत्र के सम्बन्ध में ” मौलिक एवं अप्रकाशित ” शब्द लिखा होना चाहिए और इसे अन्यत्र न भेजे जाने की पुष्टि हो । इस सम्बन्ध में वेबसाइट पर उपलब्ध प्रकाशन का प्रमाणपत्र (Certificate of Publication) डाउनलोड करें एवं उसे आलेख के साथ प्रेषित करें.
  8. शोध पत्र में सारणी एवं चित्रों का प्रयोग लेख के बीच में न करते हुए  अंत में सन्दर्भ या संलग्नक के रूप में करें।
  9. शोध पत्र ई-मेल द्वारा निम्न ई-मेल पते पर सम्पादकीय  कार्यालय पर भेजा जा सकता है:-aksarjournal@gmail.com
शोध पत्र लिखते समय कृपया ध्यान दें :-
(शोध पत्र में  होने वाली सामान्य त्रुटियाँ)
  1. आलेख में नई एवं मौलिक उदभावनाओं/अवधारणा के प्रतिपादन का अभाव एवं पूर्व स्थापित अवधारणा/मान्यता, स्थापना आदि का पिष्टपेषण।
  2. शोध आलेख का तार्किक एवं श्रन्खलाबध न होना और शब्दजाल की अनावश्यक उपस्थिति।
  3. सन्दर्भ साहित्य का अपर्याप्त अध्ययन।
  4. त्रुटिपूर्ण तथ्यों एवं आंकड़ो का उल्लेख।
  5. पाठ में उल्लिखित सन्दर्भ का लेख के अंत में दी गयी सन्दर्भ सूची में न लिखा जाना।
  6. सन्दर्भ में पुस्तक के संस्करण का न लिखा जाना।
  7. पाठ में व्याकरdणक् त्रुटियों का होना।
  8. वाक्य में काल का असंगत होना।
  9. लेखक के द्वारा आलेख शुद्ध करते समय शब्द /पद /वाक्य का लोप हो जाना।
  10. लेख का अपेक्षाकृत बड़ा हो जाना।
  11. विषय प्रतिपादन में विषय का अस्पष्ट होना।
  12. तथ्यों, भावों या विचारों की पुनरावृत्ति।

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