Showing posts with label Poems. Show all posts
Showing posts with label Poems. Show all posts

ये धूप मेरे घर तक भी आए तो अच्छा है

ये धूप मेरे घर तक भी आए तो अच्छा है रिश्तों की सीलन को सुखाए तो अच्छा है जो आँधियाँ अक्सर छप्पर उड़ाया करती हैं एक दफे मेरा अना* भी...
Read More

अपने जहन में संविधान रखता हूँ

मैं अपने कामों में ईमान रखता हूँ  सो सबसे अलग पहचान रखता हूँ सब इंसान लगते हैं मुझे एक जैसे  तासीर में हमेशा भगवान् रखता हूँ  ...
Read More

मैं जितना ही हूँ,उतना तो जरूर हूँ

अब इस तरह मुझे न बचा के रख फानूस के जैसे तो न सजा के रख मैं खुद तलाश लूँगा अपनी मंज़िलें बाज़ार में दाम मेरा न बता के रख मैं नई ...
Read More

जो परिन्दे डरते हैं हवाओं के बदलते रूख से

  जो मकाँ बनाते हैं,वो अपना घर नहीं बना पाते रेगिस्तान में उगने वाले पौधे जड़ नहीं बना पाते जिन्हें आदत हैं औरों के रहमो-करम पे ज...
Read More

इस होली

1. इस होली रँगना मुझे उन रंगों से जिसे जात धर्म की समझ ना हो जो छूट नहीं जाते हों बहशी बदरंग पानी से जिसकी खुशबू में न...
Read More

इन लहजों ने कुछ तो छिपा रक्खा है

इन लहजों ने कुछ तो छिपा रक्खा है कहीं आँधी कहीं तूफाँ उठा रक्खा है आँखों के दरीचे में काश्मीर दिखे हैं हर अँगड़ाई में बहार बिछा...
Read More

हवा तो बस इक बहाना था,तमाशा ये आज होना था

हवा तो बस इक बहाना था,तमाशा ये आज होना था खुदा की रजामंदी थी,आग मेरे ही घर में लगाना था मदद की ये इन्तहा थी,ये कमाल भी होना था म...
Read More

खुले आसमाँ की धूप भी पिया कर(ग़ज़ल)

आलीशान महलों में वो गर्माहट नहीं कभी खुले आसमाँ की धूप भी पिया कर कोई फर्क ही नहीं है राम और अल्लाह में दिल जिसे मानता है,नाम उसी ...
Read More