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अपने जहन में संविधान रखता हूँ

मैं अपने कामों में ईमान रखता हूँ  सो सबसे अलग पहचान रखता हूँ सब इंसान लगते हैं मुझे एक जैसे  तासीर में हमेशा भगवान् रखता हूँ  ...
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मैं जितना ही हूँ,उतना तो जरूर हूँ

अब इस तरह मुझे न बचा के रख फानूस के जैसे तो न सजा के रख मैं खुद तलाश लूँगा अपनी मंज़िलें बाज़ार में दाम मेरा न बता के रख मैं नई ...
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जो परिन्दे डरते हैं हवाओं के बदलते रूख से

  जो मकाँ बनाते हैं,वो अपना घर नहीं बना पाते रेगिस्तान में उगने वाले पौधे जड़ नहीं बना पाते जिन्हें आदत हैं औरों के रहमो-करम पे ज...
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इस होली

1. इस होली रँगना मुझे उन रंगों से जिसे जात धर्म की समझ ना हो जो छूट नहीं जाते हों बहशी बदरंग पानी से जिसकी खुशबू में न...
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इन लहजों ने कुछ तो छिपा रक्खा है

इन लहजों ने कुछ तो छिपा रक्खा है कहीं आँधी कहीं तूफाँ उठा रक्खा है आँखों के दरीचे में काश्मीर दिखे हैं हर अँगड़ाई में बहार बिछा...
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हवा तो बस इक बहाना था,तमाशा ये आज होना था

हवा तो बस इक बहाना था,तमाशा ये आज होना था खुदा की रजामंदी थी,आग मेरे ही घर में लगाना था मदद की ये इन्तहा थी,ये कमाल भी होना था म...
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मंदिरों में आरती,मस्जिदों में अजान होता नहीं(ग़ज़ल)

मंदिरों में आरती,मस्जिदों में अजान होता नहीं(ग़ज़ल)

वो आँखों में होता है जो निगाहों में होता नहीं जो हो इश्क़ में उसे फिर कोई होश होता नहीं दवा,दुआ,शाइस्तगी,हमनफ्सगी सब बेकार वो ज़ख़्...
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खुले आसमाँ की धूप भी पिया कर(ग़ज़ल)

आलीशान महलों में वो गर्माहट नहीं कभी खुले आसमाँ की धूप भी पिया कर कोई फर्क ही नहीं है राम और अल्लाह में दिल जिसे मानता है,नाम उसी ...
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आपको देखके न जाने क्या क्या सोचते होंगे

आपको देखके न जाने क्या क्या सोचते होंगे

आपको देखके न जाने क्या क्या सोचते होंगे ज़मीं पे सरगोशी करता कोई चाँद सोचते होंगे क्या कोई आतिश थी या कोई नर्म फुहार फ़िज़ा से आपके जाने के ब...
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